श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने विलय दिवस के मौके पर केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को सख्ती और प्रतिबंधों के बजाय भरोसे, संवाद और लोकतांत्रिक अधिकारों के जरिए साथ लेकर चलने की जरूरत है। उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद क्षेत्र के हालात, सुरक्षा व्यवस्था और कश्मीरियों के प्रति कथित अविश्वास का मुद्दा भी उठाया।
महबूबा मुफ्ती का यह बयान ऐसे समय आया है, जब 26 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। इससे पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला भी इस मुद्दे पर अपनी बात रख चुके हैं।
महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार से अपील की कि जम्मू-कश्मीर को केवल सुरक्षा और प्रशासनिक सख्ती के नजरिए से देखने के बजाय वहां के लोगों की भावनाओं और राजनीतिक आकांक्षाओं को भी समझा जाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के साथ रिश्ते मजबूत करने के लिए भरोसा कायम करना जरूरी है।
Aaj Tak की रिपोर्ट के मुताबिक, PDP प्रमुख ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को सख्ती से नियंत्रित करने के बजाय उनका हाथ पकड़कर साथ चलने की जरूरत है। उन्होंने महात्मा गांधी के धर्मनिरपेक्ष भारत के विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर ने भारत के साथ जुड़ने का फैसला कुछ संवैधानिक आश्वासनों और अपनी विशिष्ट पहचान की सुरक्षा की उम्मीद के साथ किया था।
महबूबा मुफ्ती ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाए जाने के फैसले पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर के लोगों की राजनीतिक और संवैधानिक सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
ABP News और Kashmir Life की रिपोर्टों के अनुसार, महबूबा ने विलय के ऐतिहासिक संदर्भ, क्षेत्र की पहचान और उस समय किए गए वादों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के भारत में शामिल होने के पीछे धर्मनिरपेक्षता और विविधता को स्वीकार करने की सोच भी महत्वपूर्ण थी।
हालांकि, अनुच्छेद 370 पर महबूबा मुफ्ती की टिप्पणी उनके राजनीतिक रुख को दर्शाती है। केंद्र सरकार का इस मुद्दे पर अलग पक्ष रहा है और इस विषय पर देश में लंबे समय से राजनीतिक तथा संवैधानिक बहस जारी है।
PDP प्रमुख ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक अभिव्यक्ति पर कथित पाबंदियों को लेकर भी चिंता जताई। उनका आरोप है कि छापेमारी, हिरासत, पूछताछ और अन्य सुरक्षा संबंधी कार्रवाइयों के कारण लोगों में डर और अविश्वास का माहौल बना हुआ है।
Kashmir News Service (KNS) की रिपोर्ट के मुताबिक, महबूबा मुफ्ती ने कहा कि सरकार को लोगों की चुप्पी को सामान्य स्थिति या सहमति नहीं मानना चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक विरोध और अपनी बात रखने के अवसरों से जुड़े सवाल भी उठाए।
ये आरोप महबूबा मुफ्ती की ओर से लगाए गए हैं। इन सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि को लेकर उपलब्ध रिपोर्टों में विस्तृत प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।
महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर के बाहर कश्मीरी लोगों के साथ कथित दुर्व्यवहार का भी उल्लेख किया। Aaj Tak की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने हरियाणा में एक कश्मीरी बस पर पत्थर फेंके जाने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि कश्मीरियों को संदेह की नजर से देखे जाने की शिकायतें चिंता पैदा करती हैं।
उन्होंने इस तरह की घटनाओं को सामाजिक भरोसे और देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों के बीच संबंधों से जोड़कर देखा। उनके मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के लोगों को देश के बाकी हिस्सों में भी सम्मान और सुरक्षा का एहसास होना चाहिए।
महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे के समाधान के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दृष्टिकोण का भी उल्लेख किया। उन्होंने इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत जैसे विचारों के जरिए समाधान तलाशने की जरूरत पर जोर दिया।
उनका कहना है कि केवल सुरक्षा उपायों से क्षेत्र की राजनीतिक समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए बातचीत, लोकतांत्रिक भागीदारी और लोगों के बीच भरोसा बढ़ाने की जरूरत है।
महबूबा मुफ्ती के बयान ने विलय दिवस के मौके पर जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक दर्जे, अनुच्छेद 370, सुरक्षा व्यवस्था और केंद्र-क्षेत्र संबंधों को लेकर राजनीतिक बहस को फिर सामने ला दिया है। PDP लंबे समय से अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर की विशेष पहचान से जुड़े मुद्दे उठाती रही है, जबकि केंद्र सरकार का रुख इस मामले में अलग रहा है।
फिलहाल महबूबा मुफ्ती के बयान का मुख्य संदेश यही है कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को केवल सख्ती और सुरक्षा व्यवस्था के जरिए देखने के बजाय संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से भी संबोधित किया जाना चाहिए। उनके आरोपों और सुझावों पर केंद्र सरकार की ओर से इस बयान के संदर्भ में कोई विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध रिपोर्टों में दर्ज नहीं है।
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